व्यंग दोहे
अपना हित जिसमें सधे,ऐसे कीजे काज
कल की चिन्ता क्यों करी ,लूटो सारा आज
अपना हित बस साध ले,मत कर पर उपकार
दया धर्म है फालतू, नैतिकता बेकार
पैर दबा तू बाॅस के, वो ही तारणहार
सेवा कर, रख खुश उन्हे,वो उन्नति का द्वार
बेवकूफ बनते यहां,सीधे सच्चे लोग
वो सबसे ज्यादा सफल,जो करते हैं ढोंग
झूठ को सच तू सिद्ध कर,हेराफेरी सीख
लहू चूस के दीन का, हमदर्दी में चीख
शालिनी शर्मा
मैं गिर जाता हूँ बिस्तर से,चोट मुझे लग जाती है
पर मेरी माँ को भी देखो ये चतुराई आती है
मुझे बिठा के इस युक्ति से कैद मुझे कर देती है
और मजे से फिर वो घर के वर्क सभी निपटाती है
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2122 2122 2122 2122
नींद लो भरपूर सारे गम,दुखो का नींद हल है
प्यार से जीवन गुजारो,ये सबक सबसे सरल है
जब सभी से दोस्ती हो ,तब बचेगी दुश्मनी क्यों
नफरतों को कम करो, इसकी जरूरत आजकल है
साथ जायेगा नही कुछ,हाथ खाली ही चलोगे
छोड़ सब होगी विदायी,बात ये बिल्कुल अटल है
जो सदा सोचे, किसी का हो भला, वो मान पाता
आज जिसका है यहाँ सम्मान, वो ही तो सफल है
ज्ञान बढ़़ता बांटने से, ये किसी ने सच कहा है
ज्ञान को कोई चुरा ले, न किसी में इतना बल है
जब गले में ड़ाल के माला हुआ सम्मान तेरा
याद में इनको सहेजो,कीमती ये खास पल है
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जल रोता है चीख चीख कर ,कोई मुझे बचाओ
मैं जीवन देता हूंँ तुमको,व्यर्थ न मुझे बहाओ
जो नल खुला छोड़ के मुझको बहा रहे हैं नाली में
उन्हें पता नही मेरी कीमत,तुम उनको समझाओ
खत्म मुझे कर दोगे गर तो ऐसा न हो जाये
आने वाले समय में मेरी एक बूंद न पाओ
गर्मी में बेहाल जानवर मुझे ढूंढ़ते घूमें
निरिह प्राणियों को पानी दे इनकी प्यास बुझाओ
जल का संचय बहुत जरूरी,वर्षा का जल भर लो
जल का संचय करने को सीमेंन्ट के टैंक बनाओ
कोई फसल बिना पानी के जीवित नहीं बचेगी
पेड़ और पोधो को पानी समय पे खूब पिलाओ
भूमि का उपजाऊपन गर रखना तुम्हें है कायम
दूषित जल खेतों,नदियों में भी न कभी बहाओ
शालिनी शर्मा
जीवन के पथ पर उगे,लम्बे लम्बे शूल
राहों की दुश्वारियां, बढ़ा रही है धूल
तूफानों का जोर है, आंधी है पुरजोर
खतरे में सब है यहां,करलो इसे कबूल
मार पड़ी है वक्त की,हावी हुआ विनाश
घर खंडहर होकर गिरा,हिली द्वार की चूल
भूकम्पो की तीव्रता,हिला रही हैं नींव
तीव्र दरारे बन गई,रहना यहां फिज़ूल
आँखों में आंसू थमें,है दहशत हर और
बुरा समय थम सा गया,समय नही अनुकूल
वक्त साथ देता नहीं, पड़ी आपदा घोर
बाढ़ फसल को खा गई,कैसे दे महसूल
कर्जदार भी मिट गये,बचे न साहूकार
दोनों ही जीवित नहीं,जो ऋण करें वसूल
शालिनी शर्मा
लहराती फसलो को देखा,मन पुलकित हो जाता है
अमिया के बागो का सुन्दर दृश्य हृदय को भाता है
गावं की चौपालो की गपशप में होता है अपनापन
ट्यूब वैल से बहता पानी मन ठड़ंक दे जाता है
शालिनी शर्मा
नेता देते आश्वासन
भला कर देगें तुम्हारा
दे के वोट तुम करो बस
भला हर समय हमारा
कोई इन के कर्म देखे
ये प्रतिनिधि हमारे
जनता को दे दिलासा
वोटो से प्यार सारा
सभी स्वार्थ में डूबे
सभी को है कुर्सी प्यारी
बिना स्वार्थ के किसी ने
नही देश को निहारा
ये हमारी बदनसीबी
जो नही तो और क्या है
के कभी न सोचा परहित
हित अपना ही संवारा
ये चुनावो का है दंगल
सभी इसमें जीत चाहते
सभी की है एक थ्योरी
लो मुद्दो का सहारा
शालिनी शर्मा
उसने आज शहर में ऐसी इक तीली सुलगाई हैं
इक चिन्गारी शोला बन कर शहर जलाने आयी है
अमन चैन की चिता जलाकर सेक रहे रोटी अपनी
कुर्सी की इस भूख ने कितनी बस्ती यहाँ जलायी हैं
शालिनी शर्मा
हम सिर झुका के हंटर के वार सहेगें
मजबूर है विरोध में हम कुछ न कहेगें
मालिक है आप और हम गुलाम आपके
जो आप कहेगें गुलाम वो ही करेगें
शोषण करो या दो इनाम आपकी मरजी
कठपुतलियाँ है हम बिना आज्ञा ना हिलेगें
सारी यहाँ सुविधायें सिर्फ आपके लिए
हम तो अभावो में यहां ऐसे ही जिएगें
कानून आपका है और सरकार आपकी
हम बेजुबान, गूंगे, बहरे यूं ही रहेगें
हैं आप तो समृद्ध, आप शक्तिशाली हैं
कमजोर के गले पे चाकू आप धरेगें
शालिनी शर्मा
माँ जैसा कोई नही , माँ तो है अनमोल
माँ की ममता को नही,कोई सकता तोल
माँ जीवन की भोर है,माँ है सुख की नींद
माँ जीवन का सार है,माँ मिश्री का घोल
माँ मूरत है प्यार की,बच्चा उसकी जान
बार बार लगती गले, चूमें लाल कपोल
मित्र सखा है दोस्त हैं,समझे सब जज़्बात
हर लेती है पीर सब, मन की खिड़की खोल
माँ का आंचल छांव दे,हिम्मत देता साथ
माँ की कोशिश से रहे,बच्चा स्वस्थ सुडोल
मुस्काए दुख में सदा,खोये कभी न धीर
माँ क्या है गर जानना,माँ का हृदय टटोल
माँ मन्दिर है ईश है, माँ पूजा का थाल
चरणामृत, नैवेद्य माँ, शुभाशीष के बोल
शालिनी शर्मा
कभी जिन्दगी शोला है और कभी जिन्दगी है शबनम
कभी जिन्दगी में खुशिया़ं है़ंं और कभी जीवन में गम
कभी धूप हैं कभी छांव है फूल भी हैं और कांटे भी
कभी जिन्दगी में उजियारा और कभी है गहरा तम
कहीं बाग में पंछी चहके और कहीं पिजंरे में हैं
कहीं पे सूखी धरती व्याकुल और कहीं बारिश रिमझिम
कहीं पे धन की वर्षा होती नहीं कहीं निर्धन पर धन
कहीं प्रेम और अपनापन है और बरसते कहीं पे बम
कहीं पे लूट खसोट मची,कोई कहीं लुटाता अपना सब
कोई ऐश महलो में लेता रोड़़ पे निकले किसी का दम
सबका जीवन अलग यहां पर, सबके सुख और दर्द अलग
सभी भाग्य में जितना है उतना पाते न ज्यादा ,कम
शालिनी शर्मा
प्यार आज है एक दिखावा, कहां प्यार सच्चा मिलता
खुशकिस्मत वालो को ही बस ,यहां मीत सच्चा मिलता
बच्चो की निश्चलता देखी तो मन मेरा सोच रहा
कुछ लोगो का क्यों तन उजला और क्यों मन काला मिलता
शालिनी शर्मा
रंग बदलकर,झूठ बोलकर,मक्कारी में अव्वल बन
यहां पे चोरी एक हुनर है,और यहां पे है छल फन
लूटपाट कर, डा़ल ड़कैती कैसे भी तू पावर पा
नैतिकता को कोन पूछता,यहां चाहिए हर पल धन
शालिनी शर्मा
परिभाषाएं बदल गई हैं आज यहां पर जीने की
दूध दही से विमुख हुए लत पैप्सी, कोला पीने की
घर का खाना नही सुहाता फास्ट फूड़ उनको भाते
लुटा रहे आडम्बर पर पे जो भी मिली महीने की
शालिनी शर्मा
सिवा दुआ के कुछ नही,प्रियवर मेरे पास
दूर गगन तो क्या हुआ,छू लो है विश्वास
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सिगरेट और तम्बाकू लेते हैं लोगो की जान
दूर रहो तम्बाकू से ये पहुंचाते शमशान
तम्बाकू देता है मुंह के कैंसर की बीमारी
दर्द भयकंर होता है और खुलती नही जुबान
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उनकी यादों को हम दिल से ऐसे दूर भगाते हैं
याद कभी भी जब आते हैं उनको काॅल लगाते है
जाने कब ये दूरी होगी कम वो वापस आयेगें
जीवन में फिर फूल खिलेगें हम खुल कर मुस्कायेगें
फोटो से उनकी बातें कर अपना दिल बहलाते हैं
याद कभी जब वो-----------
फोन की घन्टी बजती है तो ऐसा लगता है हमको
जैसे उनका भी दिल मेरी याद दिलाता है उनको
और किसी की काल देख कर नैना नीर बहाते हैं
याद कभी जब वो-------------
न श्रृंगार सुहाता है और काम न कोई भावे
मोर करे न नृत्य बाग में कोयलिया न गावे
चन्दा और सितारे अपनी आभा नही दिखाते हैं
याद कभी जब वो-------------
शालिनी शर्मा





