सरस्वती वन्दना
सच्ची वाणी भी दे दो
सभी गुण हमें दो
अभी छीन लो मुझसे झूठ और अहंकार
मगर मुझको लोटा दो सद्गुण की दौलत
दू मां तेरी सेवा में जीवन गुजार
मेरे मन को छोटा सा मन्दिर बनाना
हे माँ शारदे अपनी सेवा में लाना
मुझे देना विद्या और बुद्धि का दान
हर दम रहे मेरा माँ में ही ध्यान
ना कोई दुखी हो ना हो कोई बेबस
दुखीजन को मिल जाये खुशिया हजार
सच्ची वाणी ----------------
कभी सत्य कहने से ना हिचकिचायें
सदा प्रेम की ज्योत जग में जगायें
रहें हम विनम्र ,अहिंसक और त्यागी
दरश वीणा वाली दे कर अनुरागी
रहूँ शारदे माँ मैं तेरी उपासक
दे गीतों का पावन, सरस उपहार
सच्ची वाणी ----------------
सत्कर्म ,सत्संग की राह दिखा तू
व्यवधान के कांटे राह से हटा तू
सभी लोग कर्तव्य मन से निभायें
जग सारा ये ज्ञान से जगमगाये
मिट जाये अज्ञानता की लकीरे
खिला फूल खुशियों के ,मिटा अन्धकार
शालिनी शर्मा
सच्ची वाणी भी दे दो
सभी गुण हमें दो
अभी छीन लो मुझसे झूठ और अहंकार
मगर मुझको लोटा दो सद्गुण की दौलत
दू मां तेरी सेवा में जीवन गुजार
मेरे मन को छोटा सा मन्दिर बनाना
हे माँ शारदे अपनी सेवा में लाना
मुझे देना विद्या और बुद्धि का दान
हर दम रहे मेरा माँ में ही ध्यान
ना कोई दुखी हो ना हो कोई बेबस
दुखीजन को मिल जाये खुशिया हजार
सच्ची वाणी ----------------
कभी सत्य कहने से ना हिचकिचायें
सदा प्रेम की ज्योत जग में जगायें
रहें हम विनम्र ,अहिंसक और त्यागी
दरश वीणा वाली दे कर अनुरागी
रहूँ शारदे माँ मैं तेरी उपासक
दे गीतों का पावन, सरस उपहार
सच्ची वाणी ----------------
सत्कर्म ,सत्संग की राह दिखा तू
व्यवधान के कांटे राह से हटा तू
सभी लोग कर्तव्य मन से निभायें
जग सारा ये ज्ञान से जगमगाये
मिट जाये अज्ञानता की लकीरे
खिला फूल खुशियों के ,मिटा अन्धकार
शालिनी शर्मा
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