Friday, 27 May 2022

शालिनी शर्मा की कविताएं









व्यंग दोहे

अपना हित जिसमें सधे,ऐसे कीजे काज

कल की चिन्ता क्यों करी ,लूटो सारा आज


अपना हित बस साध ले,मत कर पर उपकार

दया धर्म है फालतू, नैतिकता बेकार


पैर दबा तू बाॅस के, वो ही तारणहार

सेवा कर, रख खुश उन्हे,वो उन्नति का द्वार


बेवकूफ बनते यहां,सीधे सच्चे लोग

वो सबसे ज्यादा सफल,जो करते हैं ढोंग


झूठ को सच तू सिद्ध कर,हेराफेरी सीख

लहू चूस के दीन का, हमदर्दी में चीख

                              शालिनी शर्मा


 मैं गिर जाता हूँ बिस्तर से,चोट मुझे लग जाती है

पर मेरी माँ को भी देखो ये चतुराई आती है

मुझे बिठा के इस युक्ति से कैद मुझे कर देती है

और मजे से फिर वो घर के वर्क सभी निपटाती है



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 2122   2122  2122   2122

नींद लो भरपूर सारे गम,दुखो का नींद हल है

प्यार से जीवन गुजारो,ये सबक सबसे सरल है


जब  सभी  से दोस्ती हो ,तब बचेगी दुश्मनी क्यों

नफरतों को कम करो, इसकी जरूरत आजकल है


साथ जायेगा नही कुछ,हाथ खाली ही चलोगे

छोड़ सब होगी विदायी,बात ये बिल्कुल अटल है


जो सदा सोचे, किसी का हो भला, वो मान पाता

आज जिसका है यहाँ सम्मान, वो ही तो सफल है


ज्ञान बढ़़ता बांटने से, ये किसी ने सच कहा है

ज्ञान को कोई चुरा ले, न किसी में इतना बल है


जब गले में ड़ाल के माला हुआ सम्मान तेरा

याद में इनको सहेजो,कीमती ये खास पल है

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जल रोता है चीख चीख कर ,कोई मुझे बचाओ

मैं जीवन देता हूंँ तुमको,व्यर्थ न मुझे बहाओ


जो नल खुला छोड़ के मुझको बहा रहे हैं नाली में

उन्हें पता नही मेरी कीमत,तुम उनको समझाओ


खत्म मुझे कर दोगे गर तो ऐसा न हो जाये

आने वाले समय में मेरी एक बूंद न पाओ


गर्मी में बेहाल  जानवर  मुझे  ढूंढ़ते  घूमें

निरिह प्राणियों को पानी दे इनकी प्यास बुझाओ


जल का संचय बहुत जरूरी,वर्षा का जल भर लो

जल का संचय करने को सीमेंन्ट के टैंक बनाओ


कोई फसल बिना पानी के जीवित नहीं बचेगी

पेड़ और पोधो को पानी समय पे खूब पिलाओ 


भूमि का उपजाऊपन गर रखना तुम्हें है कायम

दूषित जल खेतों,नदियों में भी न कभी बहाओ 

                             शालिनी शर्मा


‌ जीवन के पथ पर उगे,लम्बे लम्बे शूल

राहों  की  दुश्वारियां, बढ़ा  रही है धूल


तूफानों  का  जोर  है, आंधी है पुरजोर

 खतरे में सब है यहां,करलो इसे कबूल


मार पड़ी है वक्त की,हावी हुआ विनाश

घर खंडहर होकर गिरा,हिली द्वार की चूल


भूकम्पो की तीव्रता,हिला रही हैं नींव

तीव्र दरारे बन गई,रहना यहां फिज़ूल


आँखों में आंसू थमें,है दहशत हर और

बुरा समय थम सा गया,समय नही अनुकूल


वक्त साथ देता नहीं, पड़ी आपदा घोर

बाढ़ फसल को खा गई,कैसे दे महसूल


कर्जदार भी मिट गये,बचे न साहूकार

दोनों ही जीवित नहीं,जो ऋण करें वसूल

                                 शालिनी शर्मा

लहराती फसलो को देखा,मन पुलकित हो जाता है

अमिया के बागो का सुन्दर दृश्य हृदय को  भाता है

गावं की चौपालो की गपशप में होता है अपनापन 

ट्यूब वैल से बहता पानी  मन  ठड़ंक  दे  जाता   है

                             शालिनी शर्मा

नेता देते आश्वासन

भला कर देगें तुम्हारा

दे के वोट तुम करो बस

भला हर समय हमारा


कोई इन के कर्म देखे

ये प्रतिनिधि हमारे

जनता को दे दिलासा

वोटो से प्यार सारा


सभी स्वार्थ में डूबे

सभी को है कुर्सी प्यारी

बिना स्वार्थ के किसी ने 

नही देश को निहारा


ये हमारी बदनसीबी 

जो नही तो और क्या है

के कभी न सोचा परहित

हित अपना ही संवारा


ये चुनावो का है दंगल

सभी इसमें जीत चाहते

सभी की है एक थ्योरी

लो मुद्दो का सहारा

                  शालिनी शर्मा

उसने आज शहर में ऐसी इक तीली सुलगाई हैं

इक चिन्गारी शोला बन कर शहर जलाने आयी है

अमन चैन की चिता जलाकर सेक रहे रोटी अपनी

कुर्सी की इस भूख ने कितनी बस्ती यहाँ जलायी हैं

                           शालिनी शर्मा

हम सिर झुका के हंटर के वार सहेगें

मजबूर है विरोध में हम कुछ न कहेगें


मालिक है आप और हम गुलाम आपके

जो आप कहेगें गुलाम वो ही करेगें


शोषण करो या दो इनाम आपकी मरजी

कठपुतलियाँ है हम बिना आज्ञा ना हिलेगें


सारी यहाँ सुविधायें सिर्फ आपके लिए

हम तो अभावो में यहां ऐसे ही जिएगें


कानून आपका है और सरकार आपकी

हम  बेजुबान, गूंगे, बहरे  यूं  ही  रहेगें


 हैं आप तो समृद्ध, आप शक्तिशाली हैं

कमजोर  के गले  पे  चाकू  आप  धरेगें

                       शालिनी शर्मा

माँ जैसा कोई नही ,  माँ तो है अनमोल

माँ की ममता को नही,कोई सकता तोल


माँ जीवन की भोर है,माँ है सुख की नींद

माँ जीवन का सार है,माँ मिश्री का घोल


माँ मूरत है प्यार की,बच्चा उसकी जान

बार बार लगती गले, चूमें  लाल कपोल


मित्र सखा है दोस्त हैं,समझे सब जज़्बात

हर लेती है पीर  सब, मन की खिड़की खोल 


माँ का आंचल छांव दे,हिम्मत देता साथ

माँ की कोशिश से रहे,बच्चा स्वस्थ सुडोल


मुस्काए दुख में सदा,खोये कभी न धीर

माँ क्या है गर जानना,माँ का हृदय टटोल


माँ मन्दिर  है ईश  है, माँ पूजा का थाल                      

चरणामृत, नैवेद्य  माँ, शुभाशीष के बोल

                                 शालिनी शर्मा

कभी जिन्दगी शोला है और कभी जिन्दगी है शबनम

कभी जिन्दगी में खुशिया़ं है़ंं और कभी जीवन में गम


कभी धूप हैं कभी छांव है फूल भी हैं और कांटे भी 

कभी जिन्दगी में उजियारा और कभी है गहरा तम


कहीं    बाग  में  पंछी चहके  और  कहीं पिजंरे  में    हैं

कहीं पे सूखी धरती व्याकुल और कहीं बारिश रिमझिम


कहीं पे धन की वर्षा होती नहीं कहीं निर्धन पर धन

कहीं प्रेम और अपनापन है और बरसते कहीं पे बम


कहीं पे लूट खसोट मची,कोई कहीं लुटाता अपना सब

कोई ऐश महलो में लेता रोड़़ पे निकले किसी का दम

                     

सबका जीवन अलग यहां पर, सबके सुख और दर्द अलग

सभी  भाग्य  में  जितना   है  उतना  पाते न  ज्यादा ,कम

                       शालिनी शर्मा

प्यार आज है  एक  दिखावा,  कहां  प्यार  सच्चा  मिलता

खुशकिस्मत  वालो को  ही बस ,यहां  मीत सच्चा  मिलता

बच्चो  की   निश्चलता  देखी  तो     मन    मेरा   सोच  रहा

कुछ लोगो का क्यों तन उजला और क्यों मन काला मिलता

                    शालिनी शर्मा

रंग बदलकर,झूठ बोलकर,मक्कारी में अव्वल बन

यहां पे चोरी एक हुनर है,और यहां पे है छल फन

लूटपाट कर, डा़ल ड़कैती कैसे भी तू पावर पा

नैतिकता को कोन पूछता,यहां चाहिए हर पल धन

                        शालिनी शर्मा

परिभाषाएं बदल गई हैं आज यहां पर जीने की

दूध दही से विमुख हुए लत पैप्सी, कोला पीने की

घर का खाना नही सुहाता फास्ट फूड़ उनको भाते 

लुटा रहे आडम्बर पर पे जो भी मिली  महीने की

                            शालिनी शर्मा

सिवा दुआ के कुछ नही,प्रियवर मेरे पास

दूर गगन तो क्या हुआ,छू लो है विश्वास

           –––----—–––--–––--------

सिगरेट और तम्बाकू लेते हैं लोगो की जान

दूर रहो तम्बाकू से ये पहुंचाते शमशान

तम्बाकू देता है मुंह के कैंसर की बीमारी

दर्द भयकंर होता है और खुलती नही जुबान

                  ------------------

 उनकी यादों को हम दिल से ऐसे दूर भगाते हैं

याद कभी भी जब आते हैं उनको काॅल लगाते है


जाने कब ये दूरी होगी कम वो वापस आयेगें

जीवन में फिर फूल खिलेगें हम खुल कर मुस्कायेगें

फोटो से उनकी बातें कर अपना दिल बहलाते हैं

याद कभी जब वो-----------


फोन की घन्टी बजती है तो ऐसा लगता है हमको

जैसे उनका भी दिल मेरी याद दिलाता है उनको

और किसी की काल देख कर नैना नीर बहाते हैं

याद कभी जब वो-------------


न श्रृंगार सुहाता है और काम न कोई भावे

मोर करे न नृत्य बाग में कोयलिया न गावे

चन्दा और सितारे अपनी आभा नही दिखाते हैं

याद कभी जब वो-------------

                          शालिनी शर्मा

Monday, 16 May 2022

दुनिया गम का एक समुन्दर

 दुनिया गम का एक समुन्दर

जहां दफन हर आस है

जहां देखिये जिधर देखिये

पीडा़ओं का वास है

उम्मीदो के खंडहर है

कब्रो में लाचारी है

घोर निराशाओं के वन 

फिरते हर ओर शिकारी हैं

यहां विवशता के जालो में

कैद मकड़िया मरती है

सड़ी गली मर्यादाये

सड़को पर क्रन्दन करती हैं

            शालिनी शर्मा भारत मां के उन वीरो को नमन जो घर नही आते हैं

देश की रक्षा में जो अपना सब अर्पण कर जाते हैं


देश सुरक्षा की खातिर ये वीर जान दे देते हैं

नमन उन्हे है जो शहीद हो अपना लहू बहाते हैं


आसमान हो या धरती हो या हो जल की गहराई

जल में,थल मेंऔर वायु में सैनिक शौर्य दिखाते हैं


लेह,सियाचिन के बर्फीले तूफानो को सहते हैं

और तिरंगा बर्फ की ऊंची चोटी पर फहराते हैं


दुश्मन की ललकार पे सीना ताने आगे बढ़ते हैं

नही दिखाते पीठ वो गोली सीने पर ही खाते हैं


अगर आँख दिखलाये दुश्मन, या धोखे से वार करे

तब दुश्मन के घर घुस जाते हैं और उसे मिटाते हैं

                          शालिनी शर्मा

 नजरे मिला नजर से, नजरो से कुछ कहा

शायद जुंबा से कहने को बाकी न कुछ रहा

घर जल रहा था मेरा और तेज थी हवा 

दे दी दुआ किसी ने कोई ले रहा मजा

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 उलझनो को न चेहरे पे लाया करो

गम सभी को न अपने बताया करो

रोते चेहरे किसी को भी भाते नही

इस लिए हर समय मुस्कुराया करो

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 नही खरीदी जा सकती पैसो से यहाँ तमीज कोई

गुणवत्ता के बिना फसल अच्छी न देगा  बीज कोई

संस्कार मिलते अब हमको कुछ ही लोगो के अन्दर

स्वाभिमान से बढ़़, न इस दुनिया में अच्छी चीज कोई

                शालिनी शर्मा

तू मेरी आँखों का तारा 

तू है मेरा राज दुलारा

तुझे चूम कर मैं पुचकारूं

अखिंयों से मैं नजर उतारूं

तुझ पर जाऊं मैं बलिहारी

तू है फूल खिली फुलवारी

तू ही है मेरा संसार

तुझ पर आता मुझको प्यार

सदा रहे तू खुश,आबाद

ले ले माँ का आशिर्वाद

तू मेरा छोटा सा ललना

नाम मेरा रोशन तू करना

तुझसे हो मेरी पहचान

मुझे दिलाना तू सम्मान

               शालिनी शर्मा

भरे पेट वाले ही कमियां थाली में गिनवाते हैं

जिन्हे रोटिया नही मयस्सर वो जूठन भी खाते हैं


एक तरफ तो महफिल में महलों में सजी हैं दीवारे

और कहीं पर सर्द रात में कुछ न तन ढक पाते हैं

                         

ये विकास कुछ का ही होता ह्रास सहे बाकी जनता

भरी तिजोरी वाले बस सुविधा का लाभ उठाते हैं


कहां हुई है खत्म कुरीति आज भी दूल्हे बिकते हैं

पिता बेटियों की शादी की फिक्र में सो नही पाते हैं


इन्हे देखिये इन आँखों का नीर नही थम पाता है

दहशतगर्द चिराग बुझा गये घर का ये  बतलाते हैं


व्यापारी जो बड़े यहां पर उन्ही का फलता है व्यापार

छोटे व्यापारी तो लागत तक निकाल न पाते हैं

  

जागीरदारी खत्म हो गई है पर शोषण नही रूका

यहां आज भी कुछ अमीर निर्धन के हक खा जाते हैं

                        शालिनी शर्मा 

माँ जैसा कोई नही ,  माँ तो है अनमोल

माँ की ममता को नही,कोई सकता तोल


माँ जीवन की भोर है,माँ है सुख की नींद

माँ जीवन का सार है,माँ मिश्री का घोल


माँ मूरत है प्यार की,बच्चा उसकी जान

बार बार लगती गले, चूमें  लाल कपोल


मित्र सखा है दोस्त हैं,समझे सब जज़्बात

हर लेती है पीर  सब, मन की खिड़की खोल 


माँ का आंचल छांव दे,हिम्मत देता साथ

माँ की कोशिश से रहे,बच्चा स्वस्थ सुडोल


मुस्काए दुख में सदा,खोये कभी न धीर

माँ क्या है डर जानना,माँ का हृदय टटोल


माँ मन्दिर  है ईश  है, माँ पूजा का थाल                      

चरणामृत, नैवेद्य  हैं, शुभाशीष के बोल

                                 शालिनी शर्मा

 जीवन के पथ पर उगे,लम्बे लम्बे शूल

राहों  की  दुश्वारियां, बढ़ा  रही है धूल


तूफानों  का  जोर  है, आंधी है पुरजोर

 खतरे में सब है यहां,करलो इसे कबूल


मार पड़ी है वक्त की,हावी हुआ विनाश

घर खंडहर होकर गिरा,हिली द्वार की चूल


भूकम्पो की तीव्रता,हिला रही हैं नींव

तीव्र दरारे बन गई,रहना यहां फिज़ूल


आँखों में आंसू थमें,है दहशत हर और

बुरा समय थम सा गया,समय नही अनुकूल


वक्त साथ देता नहीं, पड़ी आपदा घोर

बाढ़ फसल को खा गई,कैसे दे महसूल


कर्जदार भी मिट गये,बचे न साहूकार

दोनों ही जीवित नहीं,जो ऋण करें वसूल

                                 शालिनी शर्मा

 जल रोता है चीख चीख कर ,कोई मुझे बचाओ

मैं जीवन देता हूंँ तुमको,व्यर्थ न मुझे बहाओ


जो नल खुला छोड़ के मुझको बहा रहे हैं नाली में

उन्हें पता नही मेरी कीमत,तुम उनको समझाओ


खत्म मुझे कर दोगे गर तो ऐसा न हो जाये

आने वाले समय में मेरी एक बूंद न पाओ


गर्मी में बेहाल  जानवर  मुझे  ढूंढ़ते  घूमें

निरिह प्राणियों को पानी दे इनकी प्यास बुझाओ


जल का संचय बहुत जरूरी,वर्षा का जल भर लो

जल का संचय करने को सीमेंन्ट के टैंक बनाओ


कोई फसल बिना पानी के जीवित नहीं बचेगी

पेड़ और पोधो को पानी समय पे खूब पिलाओ 


भूमि का उपजाऊपन गर रखना तुम्हें है कायम

दूषित जल खेतों,नदियों में भी न कभी बहाओ 

                             शालिनी शर्मा

दारू तो न देसी अच्छी और न सही विदेशी

दारू पीने वालों से तो अच्छे यहां मवेशी

गाड़ी नहीं चलाना दारू पीकर कभी सड़क पर

वरना यम के दफ्तर में हो जाते कहीं न पेशी

‌।                                  शालिनी शर्मा

Friday, 25 March 2022

सच्ची वाणी भी देदो

    सरस्वती वन्दना 
सच्ची वाणी भी दे दो 
सभी गुण हमें दो 
अभी छीन लो मुझसे झूठ और अहंकार 
मगर मुझको लोटा दो सद्गुण की दौलत 
दू मां तेरी सेवा में जीवन गुजार 
    मेरे मन को छोटा  सा मन्दिर बनाना 
    हे माँ शारदे अपनी सेवा में लाना 
     मुझे देना विद्या और बुद्धि का दान 
     हर दम  रहे मेरा माँ में ही ध्यान 
ना कोई दुखी हो ना हो कोई बेबस 
दुखीजन को मिल जाये खुशिया हजार 
सच्ची वाणी ----------------
    कभी सत्य  कहने से ना हिचकिचायें 
    सदा प्रेम की ज्योत जग में जगायें 
    रहें हम विनम्र ,अहिंसक और त्यागी 
    दरश वीणा वाली दे कर अनुरागी 
रहूँ शारदे माँ मैं तेरी उपासक 
दे गीतों का पावन, सरस उपहार 
सच्ची वाणी ----------------
    सत्कर्म ,सत्संग  की राह  दिखा तू
    व्यवधान के कांटे राह से हटा तू
    सभी लोग कर्तव्य मन से निभायें 
    जग सारा ये ज्ञान से जगमगाये 
मिट जाये अज्ञानता की लकीरे  
खिला फूल खुशियों के ,मिटा अन्धकार 
                     शालिनी शर्मा