Thursday, 13 November 2014

KYA PAYA KYA GAVAYA

क्या पाया क्या गँवाया करे जिन्दगी सवाल 
उलझन ना सुलझे ऐसा उलझा जिन्दगी का जाल 
       किसकी नजर ने खुशियों का हुलिया बिगाड़ा है 
       उल्लास का रंग हल्का गम का रंग गाढ़ा है 
       जिन्दगी के पृष्ठ कोरे खालीपन की मैं मिसाल 
उलझन ना -----------------------
       आकाश पूछता है उड़ना कम क्यों कर दिया
       पंछी तेरे परो को किसने कतर दिया 
       क्यों सपनो के उड़ान की थम सी गयी है चाल 
उलझन ना -----------------------
        प्रश्नो के प्रश्नचिन्हो से जीवन मेरा घिरा 
         मजबूत महल तिनके तिनके होके यों गिरा
        बुनियाद  की ईंटें किसी ने दी सभी निकाल 
उलझन ना ----------------------
                                   शालिनी शर्मा 
  

Saturday, 8 November 2014

KATI PATANG

नीलगगन सुन मेरे जीवन की ये अन्तिम भोर है 
हूँ पतंग मैं ऐसी जिसकी कटी हुई डोर है 
     आसमान में जब होती हूँ 
     इठलाती बलखाती हूँ 
      पवन के झोंकों के संग 
      झूम झूम मैं कमर हिलाती हूँ 
मैं हूं आसमान में नीचे लोग मचाते शोर हैं 
हूँ पतंग मैं --------------------------
        बिना सहारे राह ना सूझे 
        इत जाऊं या  उत जाऊं 
        डोर बिना मैं भंवर के जल में 
        भय के अब गोते खाऊँ 
राही हूँ उस आसमान की जिसका ओर ना छोर है 
हूँ पतंग मैं --------------------------
          नीचे भीड़ देख मुझको 
          लुट जाने का आभास हुआ 
           खेल खेलते रहे खिलाडी 
           पर मेरा सर्वनाश हुआ 
कागज की देह झपट झपट सब आजमाते जोर हैं 
हूँ पतंग मैं -------------------------
                          शालिनी शर्मा 
 

Monday, 3 November 2014

DIL TODNE VALE

दिल तोड़ने वाले तुझे रुसवा नही किया 
पूछा सभी ने कोन था पर नाम नही लिया 
   तू बेवफा हुआ ये सितम कैसे क्यों किया 
   ऐसा क्या मिल गया तुझे जो मैंने नही दिया 
मजबूरी क्या थी तू जरा इतना बता तो दे 
मजबूरियों का अपनी जिक्र क्यों नही किया 
   चौखट की हर आहट पे मैं द्वारे पे आती हूँ 
   तेरे इंतजार का समय थमने नहीं दिया 
तू लौट आयेगा ये आस अब भी जगी है 
मैंने दीया विश्वास का बुझने नही दिया 
   अहसास करके घायल छिड़का नमक दगा का 
    उस बेवफा ने चैन से मरने नही दिया 
किया कब्र में दफ़न उस पे मिटटी डाल दी 
मेरे दुश्मनों को जश्न तक करने नही दिया 
     वो कब्र पे भी आया मेरे सनम को लेकर 
     मरने के बाद भी जखम भरने नही दिया 
मेरी गीली कब्र चूम के बोला वो गर्व से 
अंजामे मुहब्बत को सँवरने नही दिया 
    मेरी जिन्दगी में पहले जैसा है तेरा वजूद 
    मैंने तेरा आकार सिमटने नही दिया 
                                          शालिनी शर्मा