Thursday, 13 November 2014

KYA PAYA KYA GAVAYA

क्या पाया क्या गँवाया करे जिन्दगी सवाल 
उलझन ना सुलझे ऐसा उलझा जिन्दगी का जाल 
       किसकी नजर ने खुशियों का हुलिया बिगाड़ा है 
       उल्लास का रंग हल्का गम का रंग गाढ़ा है 
       जिन्दगी के पृष्ठ कोरे खालीपन की मैं मिसाल 
उलझन ना -----------------------
       आकाश पूछता है उड़ना कम क्यों कर दिया
       पंछी तेरे परो को किसने कतर दिया 
       क्यों सपनो के उड़ान की थम सी गयी है चाल 
उलझन ना -----------------------
        प्रश्नो के प्रश्नचिन्हो से जीवन मेरा घिरा 
         मजबूत महल तिनके तिनके होके यों गिरा
        बुनियाद  की ईंटें किसी ने दी सभी निकाल 
उलझन ना ----------------------
                                   शालिनी शर्मा 
  

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