दिल तोड़ने वाले तुझे रुसवा नही किया
पूछा सभी ने कोन था पर नाम नही लिया
तू बेवफा हुआ ये सितम कैसे क्यों किया
ऐसा क्या मिल गया तुझे जो मैंने नही दिया
मजबूरी क्या थी तू जरा इतना बता तो दे
मजबूरियों का अपनी जिक्र क्यों नही किया
चौखट की हर आहट पे मैं द्वारे पे आती हूँ
तेरे इंतजार का समय थमने नहीं दिया
तू लौट आयेगा ये आस अब भी जगी है
मैंने दीया विश्वास का बुझने नही दिया
अहसास करके घायल छिड़का नमक दगा का
उस बेवफा ने चैन से मरने नही दिया
किया कब्र में दफ़न उस पे मिटटी डाल दी
मेरे दुश्मनों को जश्न तक करने नही दिया
वो कब्र पे भी आया मेरे सनम को लेकर
मरने के बाद भी जखम भरने नही दिया
मेरी गीली कब्र चूम के बोला वो गर्व से
अंजामे मुहब्बत को सँवरने नही दिया
मेरी जिन्दगी में पहले जैसा है तेरा वजूद
मैंने तेरा आकार सिमटने नही दिया
शालिनी शर्मा
तू लौट आयेगा ये आस अब भी जगी है
मैंने दीया विश्वास का बुझने नही दिया
अहसास करके घायल छिड़का नमक दगा का
उस बेवफा ने चैन से मरने नही दिया
किया कब्र में दफ़न उस पे मिटटी डाल दी
मेरे दुश्मनों को जश्न तक करने नही दिया
वो कब्र पे भी आया मेरे सनम को लेकर
मरने के बाद भी जखम भरने नही दिया
मेरी गीली कब्र चूम के बोला वो गर्व से
अंजामे मुहब्बत को सँवरने नही दिया
मेरी जिन्दगी में पहले जैसा है तेरा वजूद
मैंने तेरा आकार सिमटने नही दिया
शालिनी शर्मा
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