Monday, 3 November 2014

DIL TODNE VALE

दिल तोड़ने वाले तुझे रुसवा नही किया 
पूछा सभी ने कोन था पर नाम नही लिया 
   तू बेवफा हुआ ये सितम कैसे क्यों किया 
   ऐसा क्या मिल गया तुझे जो मैंने नही दिया 
मजबूरी क्या थी तू जरा इतना बता तो दे 
मजबूरियों का अपनी जिक्र क्यों नही किया 
   चौखट की हर आहट पे मैं द्वारे पे आती हूँ 
   तेरे इंतजार का समय थमने नहीं दिया 
तू लौट आयेगा ये आस अब भी जगी है 
मैंने दीया विश्वास का बुझने नही दिया 
   अहसास करके घायल छिड़का नमक दगा का 
    उस बेवफा ने चैन से मरने नही दिया 
किया कब्र में दफ़न उस पे मिटटी डाल दी 
मेरे दुश्मनों को जश्न तक करने नही दिया 
     वो कब्र पे भी आया मेरे सनम को लेकर 
     मरने के बाद भी जखम भरने नही दिया 
मेरी गीली कब्र चूम के बोला वो गर्व से 
अंजामे मुहब्बत को सँवरने नही दिया 
    मेरी जिन्दगी में पहले जैसा है तेरा वजूद 
    मैंने तेरा आकार सिमटने नही दिया 
                                          शालिनी शर्मा 
                                             

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