इश्क़-ए-दरिया में गोते लगाना मगर , सोच करके इसे पार जाना भी है । ज़िंदगी शायरों की ग़ज़ल बन गई , हर क़दम पे इसे गुनगुनाना भी है।। अबतो शाया भी मुझसे लगा रूठने, शाम होते ही जानें कहाँ जाता है । यह ज़माने का जौहर हो या हो सितम, फिर से रूठे हुओं को मनाना भी है ।। शुक्रिया तुमको लख-लख मेरे हमसफ़र , छोड़ना हाथ से अब न पतवार को । तुम खिवैया हो जीवन की नैया के जब, पार कर लेंगे सागर की मझधार को।। **पथिक
Monday, 28 December 2015
Tuesday, 15 December 2015
Thursday, 10 December 2015
ahsas
तेरे होने का इक अहसास ही मुस्कान लाता है
नजर में तू ही तू ,दिल को भी बस तू तो भाता है
मेरी हर बात में बस जिक्र तेरा ही तो होता है
तू आखिर कोन है जिसपे हमेशा प्यार आता है
कभी तू मुस्कुराता है ,कभी नखरे दिखाता है
कभी शबनम की बूंदे बन के ,नेह बूंदे गिराता है
तेरी परछाइयों से ,सायों से घर सवांरता है
कभी मरहम तू ,दर्दे दिल कभी खुद बन के आता है
दिये की रोशनी है तू ,अंधेरो को हटाता है
तू पूजा का वो मन्दिर है जो मन पावन बनाता है
समुन्दर सा है गहरा तू ,घना तरुवर की छाया सा
तू देके होंसला हरदम ,बिखरने से बचाता है
शालिनी शर्मा
नजर में तू ही तू ,दिल को भी बस तू तो भाता है
मेरी हर बात में बस जिक्र तेरा ही तो होता है
तू आखिर कोन है जिसपे हमेशा प्यार आता है
कभी तू मुस्कुराता है ,कभी नखरे दिखाता है
कभी शबनम की बूंदे बन के ,नेह बूंदे गिराता है
तेरी परछाइयों से ,सायों से घर सवांरता है
कभी मरहम तू ,दर्दे दिल कभी खुद बन के आता है
दिये की रोशनी है तू ,अंधेरो को हटाता है
तू पूजा का वो मन्दिर है जो मन पावन बनाता है
समुन्दर सा है गहरा तू ,घना तरुवर की छाया सा
तू देके होंसला हरदम ,बिखरने से बचाता है
शालिनी शर्मा
Wednesday, 2 December 2015
Tasvir
तस्वीर का तस्वीर से मिलान कीजिये
सम्मान का अजी यहां सम्मान कीजिये
कुछ भी नहीं बदला चमन पहले सा है फूलों
फिर से वही खुशबु वही मुस्कान दीजिये
शालिनी शर्मा
सम्मान का अजी यहां सम्मान कीजिये
कुछ भी नहीं बदला चमन पहले सा है फूलों
फिर से वही खुशबु वही मुस्कान दीजिये
शालिनी शर्मा
Tuesday, 1 December 2015
Kon ghoda
घोड़े को गधा ,गधे को घोड़ा सब समझते हैं
है बोझ घोड़े पे उसूलों का वो नहीं दौड़ा सब समझते हैं
रेस जिन्दा है गधो के दम पर यहाँ
ये थोड़ा तुम भी ,हम भी थोड़ा सब समझते हैं
शालिनी शर्मा
है बोझ घोड़े पे उसूलों का वो नहीं दौड़ा सब समझते हैं
रेस जिन्दा है गधो के दम पर यहाँ
ये थोड़ा तुम भी ,हम भी थोड़ा सब समझते हैं
शालिनी शर्मा
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