तेरे होने का इक अहसास ही मुस्कान लाता है
नजर में तू ही तू ,दिल को भी बस तू तो भाता है
मेरी हर बात में बस जिक्र तेरा ही तो होता है
तू आखिर कोन है जिसपे हमेशा प्यार आता है
कभी तू मुस्कुराता है ,कभी नखरे दिखाता है
कभी शबनम की बूंदे बन के ,नेह बूंदे गिराता है
तेरी परछाइयों से ,सायों से घर सवांरता है
कभी मरहम तू ,दर्दे दिल कभी खुद बन के आता है
दिये की रोशनी है तू ,अंधेरो को हटाता है
तू पूजा का वो मन्दिर है जो मन पावन बनाता है
समुन्दर सा है गहरा तू ,घना तरुवर की छाया सा
तू देके होंसला हरदम ,बिखरने से बचाता है
शालिनी शर्मा
नजर में तू ही तू ,दिल को भी बस तू तो भाता है
मेरी हर बात में बस जिक्र तेरा ही तो होता है
तू आखिर कोन है जिसपे हमेशा प्यार आता है
कभी तू मुस्कुराता है ,कभी नखरे दिखाता है
कभी शबनम की बूंदे बन के ,नेह बूंदे गिराता है
तेरी परछाइयों से ,सायों से घर सवांरता है
कभी मरहम तू ,दर्दे दिल कभी खुद बन के आता है
दिये की रोशनी है तू ,अंधेरो को हटाता है
तू पूजा का वो मन्दिर है जो मन पावन बनाता है
समुन्दर सा है गहरा तू ,घना तरुवर की छाया सा
तू देके होंसला हरदम ,बिखरने से बचाता है
शालिनी शर्मा

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