Thursday, 10 December 2015

ahsas

तेरे होने का इक अहसास ही मुस्कान लाता है 
नजर में तू ही तू ,दिल को भी बस तू तो भाता है 
मेरी हर बात में बस जिक्र तेरा ही तो होता है
तू आखिर कोन है जिसपे हमेशा प्यार आता है 
         कभी तू मुस्कुराता है ,कभी नखरे दिखाता है 
        कभी शबनम की बूंदे बन के ,नेह बूंदे गिराता है 
       तेरी परछाइयों से ,सायों से घर सवांरता है 
      कभी मरहम तू ,दर्दे दिल कभी खुद बन के आता है 
दिये की रोशनी है तू ,अंधेरो को हटाता है 
तू पूजा का वो मन्दिर है जो मन पावन बनाता है 
समुन्दर सा है गहरा तू ,घना तरुवर की छाया सा 
तू देके होंसला हरदम ,बिखरने से बचाता है 
                                   शालिनी शर्मा

 

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