Tuesday, 17 June 2014

HASYAI

 छोड़ के पत्नी चली गयी है 
साँस चैन की पाऊं मैं 
टली मुसीबत मिली आजादी 
कैसे ख़ुशी छुपाऊं मैं 
             पत्नी ने भइया बुलवाये 
              कहती उसे  सताऊँ मैं 
वो मुझसे मैं उससे दुखी था 
कह गयी अब ना आऊं मैं 
               साथ में ले गये बला को अपनी 
                मन ही मन मुस्काऊँ मैं 
सास ससुर और सब सालो का 
नित आभार मनाऊँ मैं 
             रोज मेरी इन्कम गिनती थी 
             अब दिल खोल उड़ाउँ मैं 
राशन ला थैला देती थी 
अब होटल में खाऊँ मैं 
              दोस्त मेरे ना भाते उसको 
              महफ़िल अब घर जमाऊँ मैं 
मदिरा पीता था लड़ती थी 
अब दिन में भी चढ़ाऊँ मैं 
                   शालिनी शर्मा 

kavita

संवेदनाओं का महल खण्डहर सा हो गया 
आदमी यहां पत्थर का हो गया 
    अच्छी सलाह देना उसने बंद कर दिया 
    नेकी का पाठ तीर और खंजर सा हो गया 
मैं डूब रही थी बचाने ना कोई आया 
अब ये नजारा खेल के मंजर सा हो गया 
                             शालिनी शर्मा 

Saturday, 14 June 2014

hasy vyatha घर में अथितियों ने डेरा यूं जमाया

घर में अथितियों ने डेरा यूँ जमाया जैसे 
कुर्सी पे जमे हुये नेता बेशुमार हैं 
ओबामा और इंग्लैंड की महारानी जैसा दौरा 
सेवा में लगा हमारा पूरा परिवार है 
रिक्शा तलक से ना हम कभी घूमे दिल्ली 
पर उनके लिए तो कार तैयार है 
मुर्गमुसल्लम ना खायी कभी बिरयानी 
पर उनके लिये तो महंगा मांसाहार है 
एक कहावत अतिथि  देवो भव होते 
पर महगांई में अतिथि सिर का भार हैं 
जेब का कचूमर निकालने वाले अतिथि 
तुम्हे दूर से प्रणाम करें बार बार हैं 
शालिनी शर्मा 


राते जिनकी होती हैं जगमग दीवाली जैसी 
भैया वो तो एक नम्बरी नही होते हैं 
एक नम्बर का कमाने वाले दोस्तों 
चिन्ता के अंधेरो को दिन रात ढोते हैं 
बच्चो की फ़ीस और घर का किराया 
बिटिया की शादी कैसे हो सोच सोते हैं 
एक नम्बर की कमायी का यही है रोना 
कैसे करे पूरे खर्चे दिनरात रोते हैं 
शालिनी शर्मा  

Thursday, 12 June 2014

geet

  सोना मेह्गां होता जाये 
सजना कंगना ना दिलवाये
सखी सहेली लेकर आयें जब सोने की बाली 
मन में टीस उठे सजना की जेब देख के खाली
गहने पहन के वो इतरायें 
सोना महंगा ---------------
बात ना मानूं रूठ रूठ के मैं नखरे दिखलाऊं 
गहने देख दुकानो पे मैं ठिठक ठिठक रुक जाऊं
अगले साल दिला दूंगा वो मुझको ये कह के बहलाये 
सोना महंगा --------------
आलिंगन कर प्यार का कंगन सजना ने पहनाया 
चूड़ी से सिंदूर से बिंदी से श्रंगार कराया 
सजना तू ही गहना मेरा कंगना अब मोहे ना भाये 
सोना महंगा ------------
पैर में पायल हो ,बिछवे हो और ना कुछ मैं चाहूं 
साथ रहे जीवन भर सजना दुआ मैं यही मनाऊं 
खुशियां सोने की बरसात तन और मन दोनों को भिगायें 
                               सोना सस्ता चाहें हो जाये                              कंगना  अब मोहे ना भाये 
शालिनी शर्मा   
     

shahid,दुनिया में सबसे ज्यादा

                                गीत 
दुनिया में सबसे ज्यादा खुशनसीब हो गये 
अपने  वतन पे मर के जो शहीद हो गये 


      इस देश के जवानो तुम बेमिसाल हो 
धन्य हैं वो माए तुम जिनके लाल हो 
    जिनका दूध पी के शूरवीर हो गये 
अपने वतन ----------------------
         गोली जिगर पे खायी मगर उनको यूं लगा 
         आकर गले से जैसे कोई मीत हो मिला 
          उनके लिये तो मोत मन मीत हो गये 
अपने वतन ----------------------
         होली वो खेली ऐसी खून अपना बहाया 
         दीवाली में दीये ना जला खुद को जलाया 
          ईदो में मोत से गले मिल हमीद हो गये 
अपने वतन ----------------------
          वो देखो  इक शहीद तिरंगे में जा रहा 
          कुर्बानी देके अपना गौरव बढ़ा रहा 
         शव से लिपट तिरंगे भी ग़मगीन हो गये 
अपने वतन ----------------------
                                  शालिनी शर्मा