Tuesday, 17 June 2014

HASYAI

 छोड़ के पत्नी चली गयी है 
साँस चैन की पाऊं मैं 
टली मुसीबत मिली आजादी 
कैसे ख़ुशी छुपाऊं मैं 
             पत्नी ने भइया बुलवाये 
              कहती उसे  सताऊँ मैं 
वो मुझसे मैं उससे दुखी था 
कह गयी अब ना आऊं मैं 
               साथ में ले गये बला को अपनी 
                मन ही मन मुस्काऊँ मैं 
सास ससुर और सब सालो का 
नित आभार मनाऊँ मैं 
             रोज मेरी इन्कम गिनती थी 
             अब दिल खोल उड़ाउँ मैं 
राशन ला थैला देती थी 
अब होटल में खाऊँ मैं 
              दोस्त मेरे ना भाते उसको 
              महफ़िल अब घर जमाऊँ मैं 
मदिरा पीता था लड़ती थी 
अब दिन में भी चढ़ाऊँ मैं 
                   शालिनी शर्मा 

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