छोड़ के पत्नी चली गयी है
साँस चैन की पाऊं मैं
टली मुसीबत मिली आजादी
कैसे ख़ुशी छुपाऊं मैं
पत्नी ने भइया बुलवाये
कहती उसे सताऊँ मैं
वो मुझसे मैं उससे दुखी था
कह गयी अब ना आऊं मैं
साथ में ले गये बला को अपनी
मन ही मन मुस्काऊँ मैं
सास ससुर और सब सालो का
नित आभार मनाऊँ मैं
रोज मेरी इन्कम गिनती थी
अब दिल खोल उड़ाउँ मैं
राशन ला थैला देती थी
अब होटल में खाऊँ मैं
दोस्त मेरे ना भाते उसको
महफ़िल अब घर जमाऊँ मैं
मदिरा पीता था लड़ती थी
अब दिन में भी चढ़ाऊँ मैं
शालिनी शर्मा
साँस चैन की पाऊं मैं
टली मुसीबत मिली आजादी
कैसे ख़ुशी छुपाऊं मैं
पत्नी ने भइया बुलवाये
कहती उसे सताऊँ मैं
वो मुझसे मैं उससे दुखी था
कह गयी अब ना आऊं मैं
साथ में ले गये बला को अपनी
मन ही मन मुस्काऊँ मैं
सास ससुर और सब सालो का
नित आभार मनाऊँ मैं
रोज मेरी इन्कम गिनती थी
अब दिल खोल उड़ाउँ मैं
राशन ला थैला देती थी
अब होटल में खाऊँ मैं
दोस्त मेरे ना भाते उसको
महफ़िल अब घर जमाऊँ मैं
मदिरा पीता था लड़ती थी
अब दिन में भी चढ़ाऊँ मैं
शालिनी शर्मा
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