घर में अथितियों ने डेरा यूँ जमाया जैसे
कुर्सी पे जमे हुये नेता बेशुमार हैं
ओबामा और इंग्लैंड की महारानी जैसा दौरा
सेवा में लगा हमारा पूरा परिवार है
रिक्शा तलक से ना हम कभी घूमे दिल्ली
पर उनके लिए तो कार तैयार है
मुर्गमुसल्लम ना खायी कभी बिरयानी
पर उनके लिये तो महंगा मांसाहार है
एक कहावत अतिथि देवो भव होते
पर महगांई में अतिथि सिर का भार हैं
जेब का कचूमर निकालने वाले अतिथि
तुम्हे दूर से प्रणाम करें बार बार हैं
शालिनी शर्मा
राते जिनकी होती हैं जगमग दीवाली जैसी
भैया वो तो एक नम्बरी नही होते हैं
एक नम्बर का कमाने वाले दोस्तों
चिन्ता के अंधेरो को दिन रात ढोते हैं
बच्चो की फ़ीस और घर का किराया
बिटिया की शादी कैसे हो सोच सोते हैं
एक नम्बर की कमायी का यही है रोना
कैसे करे पूरे खर्चे दिनरात रोते हैं
शालिनी शर्मा
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