Saturday, 14 June 2014

hasy vyatha घर में अथितियों ने डेरा यूं जमाया

घर में अथितियों ने डेरा यूँ जमाया जैसे 
कुर्सी पे जमे हुये नेता बेशुमार हैं 
ओबामा और इंग्लैंड की महारानी जैसा दौरा 
सेवा में लगा हमारा पूरा परिवार है 
रिक्शा तलक से ना हम कभी घूमे दिल्ली 
पर उनके लिए तो कार तैयार है 
मुर्गमुसल्लम ना खायी कभी बिरयानी 
पर उनके लिये तो महंगा मांसाहार है 
एक कहावत अतिथि  देवो भव होते 
पर महगांई में अतिथि सिर का भार हैं 
जेब का कचूमर निकालने वाले अतिथि 
तुम्हे दूर से प्रणाम करें बार बार हैं 
शालिनी शर्मा 


राते जिनकी होती हैं जगमग दीवाली जैसी 
भैया वो तो एक नम्बरी नही होते हैं 
एक नम्बर का कमाने वाले दोस्तों 
चिन्ता के अंधेरो को दिन रात ढोते हैं 
बच्चो की फ़ीस और घर का किराया 
बिटिया की शादी कैसे हो सोच सोते हैं 
एक नम्बर की कमायी का यही है रोना 
कैसे करे पूरे खर्चे दिनरात रोते हैं 
शालिनी शर्मा  

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