संवेदनाओं का महल खण्डहर सा हो गया
आदमी यहां पत्थर का हो गया
अच्छी सलाह देना उसने बंद कर दिया
नेकी का पाठ तीर और खंजर सा हो गया
मैं डूब रही थी बचाने ना कोई आया
अब ये नजारा खेल के मंजर सा हो गया
शालिनी शर्मा
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